बनारस भ्रमण

ये लेख 20 मार्च 2016 का है जब मैंने अपने दो मित्रो को बनारस भ्रमण का निमंत्रण  दिया और और उन दोनों ने भी बनारस भ्रमण में रूचि दिखाई |
दोनों मित्रो के नाम क्रमश: नरेश चौधरी और जीतेन्द्र भरद्वाज  है इन दोनों का परिचय कराता हु आप सभी से

परिचय-:
नरेश चौधरी-: नरेश जी बहुत ही सुलझे हुए इंसान है और बहुत ही उच्च कोटि के घुमक्कड़ व् फ़ोटोग्राफर है ये बहुत ही जीवंत फोटोग्राफी करते है इनकी आतंरिक शक्ति का में कायल हु ये कठिन से कठिन ट्रेक पर भी  इनको कभी हिम्मत हारते या परेशान होते नहीं देखा हर कठिन समय में मैंने इन्हें बहुत ही शांत पाया |इनका ध्यान कभी परेशानिं पर नहीं होता ध्यान सिर्फ लक्ष्य पर रखते है और आगे बढ़ते जाते है |

 जितेंद्र भारद्वाज-: जितेंद्र  भरद्वाज बहुत ही हसमुख और घूमने का शौक़ीन है और यह कई प्रतिभाओ का धनी है जैसे गाना बहुत अच्छा गाता है और लिखता भी अच्छा है मेरे छोटा भाई जैसा है  खतरो का खिलाडी भी है |
                मैं नरेश  जी  को बहुत दिनो से बनारस आने को बोल रहा था पर व्यस्तता के कारण नहीं आ पा रहे थे फिर होली की छुट्टियों में आना तय हुआ तभी अचानक जितेंद्र से भी बात हो गयी और वह भी आने को तैयार हो गया और दोनों मित्रो ने नरेश जी ने भरतपुर से और जितेंद्र ने झाँसी से रेल पकड़ ली बनारस की और अगले दिन दोनों लोग बनारस स्टेशन पहुंच गये दोनो लोगों को मैं अपने कमरे पर ले आया अब दोंनो लोग नित्य क्रिया से निवृत हुए और आराम करने लगे |
और मैं नाश्ता लेने चला गया और सब्जी पूड़ी व जलेबी का नाश्ता करा कर मै ऑफिस के लिये चला गया|
          शाम को मै जल्दी ऑफिस से आ गया और बनारस घूमने की तैयारी करने लगे और और करीब 5:00 बजे कमरे से निकल गये और हमने सबे पहले अस्सी घाट जाने का और गंगा आरती देखने का निर्णय किया अब एक और सबसे बड़ी समस्या बनारस की जिसे हम लोगआम भाषा जाम कहते है बनारस का जाम कोई साधारण जाम नहीं है ये बहुत ही उच्च कोटि का जाम है अगर बनारसमें कही जाना है तो आप कम से कम एक से दो घंटे पहले निकलो तभी समय पर पहुंच पाओगे जैसे हम 7:00 बजे की आरती के लिए 5:00 बजे निकले की समय पर पहुंच गये |
अब यहाँ आ गयी जल्दी निकलने वाली बात अब जो जाम हमें मिला उसने हमारी हालत ही ख़राब कर दी कितना भयंकर जाम मिला अब नरेश जी और मुझे चिंता होने लगी कि समय पर नहीं पहुे तो आरती नहीं देख पाएंगे और इसी चिंता के बीच हम लोग बढ़ते रहे और करीब 1 घंटा 30 मिनट जाम में रहने के बाद हम अस्सी पहुंचे घाट पहूचने में भी हमें अच्छी भीड़ मिली क्युकि |

गंगा आरती-: गंगा आरती के समय अस्सी वासी व विदेशी पर्यटक और देशी पर्यटक सव घाट पर ही जमा हो जाते है गंगा आरती बनारस भ्रमण का मुख्य भाग है इसे देखने से बहुत अानंद महसूसहोता है और आरती के समय घाट का नजारा ही कुछ और होता है इस आरती को संगीत के साथ किया जाता है और इसके बाद  काशी विश्वनाथ जी की आरती भी होती है ये बहुत ही सुन्दर और विहंगम दृश्य देखने को मिलता है|
 
अस्सी की गंगा आरती 
अस्सी घाट दर्शन -: अस्सी घाट ही बनारस के 84 घाटों में सबसे ज्यादा प्रसिद्द घाट है इसी घाट की गंगा आरती को लोग देश विदेश से लोग देखने को आते है ये घाट बहुत ही पौराणिक घाट है जिसे लोग सबसे ज्यादा पसंद करते है इसी घाट के पास अस्सी मोहल्ला है जिस मोहल्ले में बहुत से विदेशी पर्यटक रहते है इसी घाट व् मोहल्ला की पटकथा पर एक पिक्चर (मोहल्ला अस्सी) भी बनी है जिसमे अस्सी मोहल्ला की संस्कृति को दिखाया गया है अस्सी मोहल्ला बनारस की हर जगह से अलग है हम तीनो ने मोहल्ला अस्सी को देखा था तो हम सब इसी लिहाज से सब कुछ बारीकीे से देख रहे थे और नरेश जी तो पिक्चर के हर एक किरदार को यहाँ तलाश रहे थे। और सब ज्यादा खुस तब हुए जब धर्मनाथपाण्डेय की छतरी देखि तो उस छतरी के नीचे फोटो लेने लगे और पूरा घूमने के बाद समय कीब 8:20 हुआ था तो अभी हमें बी एच यू व काशी विश्वनाथ के दर्शन भी करने थे |
                                                              


                                                                               अस्सी घाट पे पंडो की छतरिया
काशीविश्वनाथ दर्शन-: काशी  विश्वनाथ जी के दर्शन के लिए प्रांचीन मंदिर तो जा नहीं पाए पर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में निर्मित नया विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के लिए पहुंचे तो वहाँ पर मंदिर के कर्मचारियों ने बताया कि मंदिर बंद होने वाला है आप जल्दी दर्शन कर लीजिये तो हम जल्दी गए और दर्शन कर के जल्दी से बाहर निकले और बाहर लगी नंदीजी की प्रतिमा के दर्शन के बाद ऐसा कहा जाताहै की नंदी जी के कान में अपनी मनोकामना बताने से वह विश्वनाथ जी से सिफारिश करते है और मनोकामना पूर्ण हो जाती है तो हम कहा पीछे रहने वाले थे हम भी बोल आये नंदी जी के कान में अपने मन की बात और फिर हम मंदिर से निकल कर बाहर आ गए |
 

        बी एच यू कैंपस में विश्वनाथ मंदिर 
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय भ्रमण-: अब हम लोग उस बी एच यू कैम्पस  में थे जिसे किसी महान विद्वान ने अपने खून पसीने से सींच कर देश के बड़े विश्वविद्यालयों की श्रेनी मे लाकर खड़ा कर ये और कोई नहीं हमारे आदर्श भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय जी है मालवीय जी को इसके लिए जमीन काशी नरेश ने दान में दी और मालवीय जी ने 1916 में इसकी स्थापना की जो आज भारत के शीर्ष 10 संस्थानो में से  3 स्थान पर है जिसका बनारस कैपस 1300 एकड़ (5.3 km2) में फैला है बी एच यु 6 संस्थान व् 14 फैकल्टी को निंयंत्रित करता है इसका एक दूसरा कैम्पस बनारस से 60 किलोमीटर दूर मिर्जापुर के बरकछा में है जो 2700 एकड़ (11km2) में फैला है |                        
 

                                             
                      बी एच यू का मुख्य द्वार
बी एच यू के सामने की कॉफी का आनंद-: अब मेरे दिमाग में कॉफी जो यहाँ की प्रसिद्द है का आनंद लेने का मन हुआ पहले कभी यहाँ कॉफी नहीं पी थी तो अब दोस्तों का साथ है तो मजा दुगुना हो जायेगा | अब समस्या एक और थी मैंने कॉफी के बारे में सुना जरूर था पर कभी पी नहीं थी तो दुकान का पता नहीं था तो मैंने अपने ऑफिस में साथ काम करने वाले अयान हुसैन जो की पास में ही रहता है को फोन लगाया और कॉफी पीने का निमंत्रण दे दिया अब आने में समय लगने लगा तो मैंने फोन लगाया तो पता चला जाम बहुत है और थोड़ी देर देर बाद अयान ने फोन कर के बताया की सर जाम बहुत है माफ़ कीजिये मै नहीं आ पाउँगा तो उसने हमें दुकान का पता बताया और हम तीनो लोग पहुंच गए और कॉफी के लिए बोल दिया तो दुकान वाले भाई ने हमें कॉफी दी वह भी कोल्ड कॉफी थोड़ी देर तक कोल्ड कॉफी का आनंद लेने के बाद करीब रत के 10:45 हुए थे हम लोग कमरे की तरफ जाने अब हमें खाना खाना था तो हम अपने पसंदीदा गोपाल भोजनालय गएऔर हमने दाल रोटी और मिक्स सब्जी से खाना खाया फिर मलाई वाला दूध पीने के बाद हम लोग कमरे पर पहुंच गये|
         अगले दिन रविवार था तो हम सब थोड़ा देर तक सोए और फिर उठने के बाद हम सब नित्य क्रिया से निव्रत होकर नाश्ता करने के लिए श्री राम निष्ठान भंडार जो यहाँ अपनी पूरी सब्ज़ी व जलेबी के लिए बहुत प्रसिद्ध है। ये देशी घी से मिठाई और पूरी व जलेबी बनाते है। और खाने में एक अलग ही आनंद आता है।  नाश्ता करने के बाद हम लोग कमरे पर वापस आ गए और स्नान करने के बाद बनारस की छोटी गलियों वाले बाज़ार घूमने लगे। इसी समय मुरारी सारस्वत जो हमारे घर के पास रहता है। और यहाँ सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविध्यालय से शिक्षा ग्रहण कर रहा है। ने फ़ोन किया तो मैंने उसे बताया की मेरे दो मित्र मथुरा से यहाँ घूमने आए है। तो उसने हमें विश्वविध्यालय आने का निमंत्रण दे दिया। अब हम लोग विश्वविध्यालय पहुँच  गए। 
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविध्यालय भ्रमण:- अब हम बनारस की शान कहे जाने वाले कैम्पस में थे और यहाँ का मुख्य भवन अंग्रेज़ी शाशन में अंग्रेज़ो द्वारा बनवाया गया था। इसी भवन से रानी विक्टोरिया अपना शासन चलाया करती थी। और भ्रमण में मुरारी ने बताया कि यहाँ विद्वानों द्वारा हस्त लिखित ग्रंथो की प्रतिलिपि यहाँ सुरक्षित रखी है। जिनका साल में एक बार पूजन किया जाता है। और पूरे साल इस कक्ष में किसी को प्रवेश नहि करने दिया जाता है। मुरारी बहुत ही शातिर खोपड़ी है जिसमें कर्मकाण्डी पंडित होने के सारे गुण विद्यमान है       ये दूसरों के पैसे ख़र्च कराने में माहिर है। और बहुत बड़ा ड्रामेबाज़ भी है।  
बनारस के पान का आनंद:- अब हम बनारस के पान का आनंद लेने फिर से बाज़ार पहुँचे और पान बनवाने लगे तो मैंने मीठा पान बनवाया व नरेश जी व jitendra ने सादा पान बनवा के खाया व दस पान पैक की कराए। नरेश जी पान के बहुत शौक़ीन है। और पान के मज़े के साथ हम बाज़ार घूम रहे थे तो जितेन्द्र को बेग ख़रीदना था तो एक दुकान से बेग ख़रीद लिया। अब शाम का समय था और मुरारी ने अपने कमरे पर शाम का खाने का निमंत्रण दे रखा तो हम फिर से विश्वविध्यालय पहुँच गए। 
मुरारी के कमरे पर खाना:-मुरारी ने बहुत ही स्वादिष्ट व लज़ीज़ खाना बनाया जिसमें रोटी घर के घी के साथ व रायता बूंदी का और सब्ज़ी आलू टमाटर और अचार से जो स्वादिष्ट खाना मुरारी ने खिलाया मज़ा आ गया खाना खा के लगा ही नहीं की हम किसी छात्र के हाथ का बना हुआ खाना खा रहे है। खाना खाने के बाद हम यही आराम करने लगे और समय क़रीब रात के दस बज रहे होंगे तो हम जाने की बोले तो मुरारी हमें आज यही रोकना चाहता था पर हम कल की प्लान के हिसाब से रुकना नहीं चाहते थे और हम रात को एक बजे अपने कमरे पर पहुँचे और सो गए। 
      ये मेरे बनारस भ्रमण आशा करता हु आपको पसंद आएगा। 🙏

मुरारी के साथ नरेश जी 
 
नींबू की चाय का मज़ा
 
नरेश जी के फ़ोन से नक्का

टिप्पणियाँ

  1. शानदार यात्रा लेख नरेश भाई बहुत ही बढ़िया इंसान है

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. मैंने लेख में भी चर्चा की है 🙏

      हटाएं
  2. Amit Bhai bhahut achha likha h, ish bar mza aana shuru ho gya h, keep it up....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बनारस के कण कण में एक जगह छिपी हुई है बस देखने वाले की पारखी नजर चाहिए।

    उत्तर देंहटाएं
  4. Namaskar Amitbhai...aap Banaras ke hai is liye aap se kuch help mang raha hu.. Muje parivar ke sath Banaras or Allahabad darshan karane Octo. 2017 me aana hai.. to plz.. muje aap Banaras Junc. ke aaspas koi achcha sasta hotel... etc kaha milega.. address etc de.. or Muje 3 din 2 night rukana hai.. to sabse pahale ghumane - darshan ka start kese karu.. yah bhi ho sake to detail bataye.. plz. mera whatsapp noumber 9374273690 thanks...

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. जी मैं बनारस नहीं मथुरा का रहने वाला हु पर कल समय मिलते ही आपको फ़ोन कर के बताता हु। अगर आप फ़्री हो तो कल मुझे 9457417907 पर सम्पर्क करे

      हटाएं

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मेरी पंचमढ़ी यात्रा -[टीकमगढ़ से जबलपुर तक ]

नेपाल यात्रा [बनारस से पोखरा (नेपाल)]

पंचमढ़ी यात्रा-जबलपुर से पंचमढ़ी भाग -2